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बिहार में किउल और झाझा के बीच बिछाई जाएगी तीसरी लाइन, भारतीय रेल ने ₹962 करोड़ वाली परियोजना को दी मंजूरी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 20, 2026 07:17 am IST,  Updated : May 20, 2026 07:17 am IST

अभी किउल और झाझा के बीच मौजूदा डबल लाइन के सेक्शन का अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।

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भारतीय रेल Image Source : SOUTHERN RAILWAYS

भारतीय रेल ने दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने, परिचालन क्षमता में सुधार करने और निर्बाध रेल परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में 962 करोड़ रुपये की लागत वाली किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना की लंबाई 54 किलोमीटर होगी। ये परियोजना भारतीय रेलवे के सबसे बिजी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे पूर्वी और उत्तरी भारत में यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों की स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

तीसरी लाइन से क्या होंगे फायदे

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर परिवहन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और रेल सेवाओं की समयबद्धता और परिचालन की सामर्थ्य में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल लाइन से सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुचारू रूप से आवाजाही सुनिश्चित होगी और इसके साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास और व्यापारिक संपर्क में सहायता मिलेगी।

किउल-झाझा सेक्शन का हो रहा अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा इस्तेमाल 

अभी किउल और झाझा के बीच मौजूदा डबल लाइन के सेक्शन का अधिकतम क्षमता से भी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है जबकि आने वाले सालों में इस कॉरिडोर पर यातायात की मांग और बढ़ने की उम्मीद है, जिसके लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता होगी। इस परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच संपर्क और मजबूत होगा। साथ ही, इससे उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच माल ढुलाई भी आसान होगी।

रेलवे के सबसे बिजी नेटवर्क कॉरिडोर में से एक

बताते चलें कि ये रूट कोलकाता/हल्दिया बंदरगाहों और रक्सौल/नेपाल के बीच महत्वपूर्ण रूप से संपर्क प्रदान करता है और बाढ़ एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी सहित प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी भारी माल ढुलाई के लिए मालगाड़ियों के परिवहन को संभालता है। इस रेल सेक्शन को भारतीय रेलवे के सबसे बिजी यातायात वाले नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित किया गया है।

पूर्वी और उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच होगी बेहतर कनेक्टिविटी

इस रणनीतिक गलियारे पर बढ़ते यातायात की मांग को देखते हुए इस परियोजना से यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों के लिए दीर्घकालिक स्तर पर बुनियादी ढांचागत सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से बेहतर संपर्क और वहन क्षमता में अतिरिक्त वृद्धि से पूर्वी और उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच सामग्रियों की आवाजाही की सामर्थ्य बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और रेल परिवहन की विश्वसनीयता में सुधार होगा।

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